Nanhe Kadam..

नन्हे कदम लेकर आये थे हम, किलकारियों का शोर लेकर आये थे हम,

अनजानापन, मासूमियत, और खुदा का नूर लेकर आये थे हम |

देखा यहाँ तो हर पल हे बदलता मौसम ,बांटी थोड़ी खुशियाँ , पिए थोड़े गम

ये तो हे ज़रूर किसीकी दुवाओं का दम , वीरानियों के मंज़र में मिले आप और हम |

 

मलाल तो बस इसी बात का रह गया , की जी भरकर आपको बतिया भी न सके हम ,

ये सैलाब जो उमडा था रूह में , उसे दिल-ओ-जान से बहा भी न सके हम |

यू तो अपने सीने में लिए फिरते हे प्यार का दरिया ,

बावजूद इसके आपकी की प्यास भी बुझा न सके हम |

 

प्यास के तो किया कहने हे , उसकी तो अपनी ही एक कशिश हे ,

आपके चले जाने की , अब हमे न कोई रंजिश हे ,

लेकिन मर-जायेंगे मिट-जायेंगे अगर आपकी यादे-ए-आशियाँ में एक घरौंदा भी बना न सके हम |

अब तो हुवा हे ये मंज़र , बड़े हो गए हे पैर ,

और छोटी हो गई हे चद्दर , या खुदा यकीं नहीं आता ,

नन्हे कदम लेकर आये थे हम, किलकारियों का शोर लेकर आये थे हम ||