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Nanhe Kadam..

नन्हे कदम लेकर आये थे हम, किलकारियों का शोर लेकर आये थे हम,

अनजानापन, मासूमियत, और खुदा का नूर लेकर आये थे हम |

देखा यहाँ तो हर पल हे बदलता मौसम ,बांटी थोड़ी खुशियाँ , पिए थोड़े गम

ये तो हे ज़रूर किसीकी दुवाओं का दम , वीरानियों के मंज़र में मिले आप और हम |

 

मलाल तो बस इसी बात का रह गया , की जी भरकर आपको बतिया भी न सके हम ,

ये सैलाब जो उमडा था रूह में , उसे दिल-ओ-जान से बहा भी न सके हम |

यू तो अपने सीने में लिए फिरते हे प्यार का दरिया ,

बावजूद इसके आपकी की प्यास भी बुझा न सके हम |

 

प्यास के तो किया कहने हे , उसकी तो अपनी ही एक कशिश हे ,

आपके चले जाने की , अब हमे न कोई रंजिश हे ,

लेकिन मर-जायेंगे मिट-जायेंगे अगर आपकी यादे-ए-आशियाँ में एक घरौंदा भी बना न सके हम |

अब तो हुवा हे ये मंज़र , बड़े हो गए हे पैर ,

और छोटी हो गई हे चद्दर , या खुदा यकीं नहीं आता ,

नन्हे कदम लेकर आये थे हम, किलकारियों का शोर लेकर आये थे हम ||

Ye Aankhein

ये आँखे ..

इन आँखों की अजीब हे एक दुनिया,

दिखाती जो हे जिंदगी, देखती ये चुप-चाप,
कभी एक रौशनी , कभी एक ज़लज़ला,
जेसे तो कभी कहीं उमड़ा एक सराब ..
 
कुछ ना बोले , पर सब कुछ समझती,
कभी ये ठगती , तो कभी कातिल अदा से जान भी ये लेती जिंदगी,
जताओ सी उलझी , माँ सी सुलझी,
फिर भी ना जाने क्या हे ये कहती..
 
खुद ही के अक्स को ये देखती,
खुदही पे हे हस्ती, तो कभी खुदही से उदास,
बिखरते पत्तों सी ये ,
कभी न थमती , न रूकती,
न जाने किसे ये रहती हे धुन्दती ,
कभी दूर तो कभी पास...
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Cha Marcha ane Paapdi!

Hey there!

Now that our dearest Mr. Narendra Modi is the Hon. Prime Minister of the Republic of India, and Mrs. Anandiben Patel our new Chief Minister, something tickled in my mind to come-up with this gag/meme to welcome the new era!

Hope you all like it!

Credits- Chachu!meme

Do pankti arz kerta hu..

Hello folks,

One fine evening while switching channels of some incidences in my mind, some random words sprouted out. I thought to seize the moment and pent hem down. They are as follows:

 

"Tujhe paane ne ki ummeed me - hum is kadar khud ko guma bethe, Ki,

Jin andhero ko mitane ke liye roshan kiye the jo diye, unhi se apni duniya jala baithe.."

 

It is hard to say from where a persons mind my wander. Sometime cherished places full of childhood memories to some painful incidences haunting from the past. But in the end, we learn to make peace with all of them.

Will write again soon,

 

Love,

Harsh

The #MakerFest2014 review..

#makerfest2014 is organised in N.I.D. Paldi.

#makerfest2014 is organised in N.I.D. Paldi.

 

‪#‎MakerFest2014‬ aahh..., well i expected a lot more, considering what i have seen in other places..Anyways, some really nice exhibitions, some fantastic design ideas put forward by NID students.. Techie guys were ok-sort.. 3D printer was good.. but again you know you can't afford it so naah it was bad  rest sculpture arts were nice, good use of clay art.. No clue about workshops, couldn't attend one 

So, overall umm... thik tha.. utna maza nai aya.. was expecting hell more..

बदनाम गलिया..

क्यों उन बदनाम गलियों की चीखें सुनाई नहीं देती,

क्यों उन जंजीरों की बंदिश दिखयी नहीं देती ,

कोई ढूँढता है खुशी वाहन, कोई ढूँढता लालसा,

पल्लू पकडे है खड़ी एक सहेमी सी नज़र,

ठंडी साँसों से हें पूछती बता मेरा नाम हें क्या |

 

अमीरों की टोली में है चर्चे हज़ार उनके,

जिल्लत और बेबसी, है घनिष्ठ मित्र उनके,

यूं तो जातें हैं सभी कहने को मर्द वाहन,

क्या हकिकत में नहीं कोई मर्द यहाँ?

शायद मर्दानगी से इज्ज़त कहीं ऊपर होती है,

तभी मेरी गुडिया, आँखों में अनसु लिए सोती है !

 

एसी इज्ज़त के धकोंसले भी क्या कामके,

जो किसी और की इज्ज़त ना कर सके,

हाँ शायद लिखता हू में आवारा, शायद सोच भी हें मेरी आवारा,

लेकिन उन रूहों का क्या जो इस आवारा जिंदगी के बोझ तले आज़ादी हें मांगती?

सुन्दर शरीर की होड में , रूह कही पीछे छूट गयी ,

बना दिया उनको सिर्फ एक शापित शब् |

 

अब स्त्रैण कत्पुत्लो की महफ़िल में उछलेंगे मर्दानगी के मुद्दे,

फिर होंगी बैठके निर्लाजो की समाज की व्याख्या पर,

अब ये सिखाएंगे हमे संस्कृति, जो खुद स्त्री की इज्ज़त करना नहीं जानते !

अच्छा हुवा इश्वर चले गए यहाँ से,

धरा की एसी हालत देख के वो भी रोये होते |

 

उन्हें भी तो चाहिए प्रेम, सन्मान, एक अपनापन,

लेकिन ये हवास के पुतले क्या जाने, की औरत आखिर क्या होती है !

 

क्यों उन बदनाम गलियों की चीखें सुनाई नहीं देती,

क्यों उन जंजीरों की बंदिश दिखयी नहीं देती...

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